Friday, November 29, 2013

महान गुरु स्वामी विवेकानंद के महान विचार....

'धन रहने से दरिद्रता का भय है,ज्ञान रहने पर अज्ञान का भय है, रूप में बुढ़ापे का भय है,गुण रहने से खल का भय है,उन्नति में
ईर्ष्या का भय है,यहाँ तक कि देह रहने पर मृत्यु का भय है.इस जग में सब कुछ भययुक्त है.एकमात्र वही पुरुष निर्भीक है,जिसने
सब कुछ त्याग दिया है.

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